एक नयी कविता बनाऊँ…

नव कल्पना, नव निर्माण,

नयी देह मेँ हो नया प्राण,

मूर्छित मन मेँ उल्लास जगाऊँ,

मैँ भी तो कुछ सुर मेँ गाऊँ,

एक नयी कविता बनाऊँ।

 

बिसरा दूँ मैँ यादेँ कल की,

सुनी अनसुनी फरियादेँ कल की,

जीवन मेँ नयी उमंग जगाऊँ,

मैँ भी तो कुछ सुर मेँ गाऊँ,

एक नयी कविता बनाऊँ।

 

होना था जो हो चुका है,

खोना था जो खो चुका है,

नव प्राप्ति की आस जगाऊँ,

मैँ भी तो कुछ सुर मेँ गाऊँ,

एक नयी कविता बनाऊँ।

 

कल सूरज रौशन करेगा एक नयी दुनिया,

पेड़ोँ के शाखोँ पर चटखेगी नयी कलियाँ,

आने वाले कल के सपने सजाऊँ,

मैँ भी तो कुछ सुर मेँ गाऊँ,

एक नयी कविता बनाऊँ।

 

आने वाले कल से लड़ने,

नयी चुनौतियोँ का सामना करने,

अपने अंतरमन को जगाऊँ,

मैँ भी तो कुछ सुर मेँ गाऊँ,

एक नयी कविता बनाऊँ।

रचनाकार :- नलिन  प्रशान्त  पोद्दार

 Contact details:-

Nalin Prashant Poddar

MSc in Applied Physics

Birla Institute of Technology, Mesra

Ranchi- 835215, Jharkhand

Email id: – info.nalin23@gmail.com & nalinprashant@yahoo.in

Contact no:- +91-7549422774

Facebook:- https://www.facebook.com/nalin.prashant

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