आज सुबह मैँ जगा सूरज के जगने से पहले

आज सुबह
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आज सुबह मैँ जगा सूरज के जगने से पहले,

धुँध की चादर को चीरकर आने वाली किरण के पहले,

दूर छितिज पर,

जैसे टाँग दिया हो प्रकृति ने एक धुँधला पेँसिल स्केच,

किसी मुसव्विर के जगने के पहले।

आज सुबह मैँ जगा सूरज के जगने से पहले…

चढा दी चाय की केतली “अघोरी चाचा” ने,

घर का दरवाजा खट-खटाकर पेपर दे गए “प्रमोद भैया”,

सर पर सब्जियोँ का टोकरा लिए निकल पड़ी “रामवती चाची”,

ये सब, और बहुत कुछ,

हो गया लोगो के सड़कोँ पर निकलने के पहले।

आज सुबह मैँ जगा सूरज के जगने से पहले…

इस रुह कँपाती ठंड से बेपरवाह अपने काम मेँ लगे लोग,

दो वक्त की रोटी की तलाश मेँ व्यस्त लोग,

प्रकृति के परिवर्तन को झुठलाते लोग,

चाय की चुस्की मेँ सर्दी दूर भगाते लोग,

एक नयी दुनिया दिखी मुझे सूरज के उगने के पहले।

आज सुबह जब मैँ जगा सूरज के जगने के पहले…

रचनाकार :- नलिन प्रशान्त पोद्दार

Contact details:-

Nalin Prashant Poddar

Birla Institute of Technology, Mesra

Ranchi- 835215, Jharkhand

Email id: – info.nalin23@gmail.com & nalinprashant@yahoo.in

Contact no:- +91-7549422774

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