कई देशों में लहरा रहा है शिवानंद योग का परचम

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स्वामी शिवानंद सरस्वती के शिष्य स्वामी सत्यानंद सरस्वती गुरु के आदेशनुसार योग का प्रचार-प्रसार करने दुनिया के कई देशों में गए। स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने उसे सींचा। इसका ही नतीजा है कि आज विश्व के कई देशों में योग रूपी फसल लहलहा रही है। विश्व योग सम्मेलन के पहले दिन अलग-अलग देशों के प्रतिनिधियों ने गुरु परंपरा के प्रति आस्था व्यक्त की और योग गुरुओं को नमन किया।

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मैं पेशे से पायलट था। 1968 में स्वामी सत्यानंद सरस्वती यूक्रेशिया गए और मैंने उनके संपर्क से प्रभावित होकर उन्हें गुरु बनाया। मेरे पेशेवर गुरु ने मुझे मारना सिखाया। वहीं हमारे आध्यात्मिक गुरु ने हमें प्यार करना सिखाया। गुरु से मिली सबसे प्यार करने की सीख ने मेरे जीवन को बेहतर बनाया। योग का पौधा यूक्रेशिया के शुद्ध तुलसी पौधे की तरह पवित्र रूप में स्थापित है।

स्वामी ज्ञान रत्ना, यूक्रेशिया

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योग मन की शांति और शरीर के संतुलन में सहायक है। इस बात को हमने शिवानंद योग मिशन से जुड़ने के बाद जाना। आज योग गुरु ने हमें इस भौतिकवादी युग में शांति प्रदान की।

– स्वामी अकलेश, कजाकिस्तान

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योग क्रांति ही विश्व की भावी संस्कृति है। स्वामी सत्यानंद की यह वाणी धीरे-धीरे मूर्त रूप ले रही है। तीसरा विश्व योग सम्मेलन गुरु की उक्त वाक्य को मजबूती देगी।

– आनंद रत्ना, स्वीटजरलैंड

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जीवन को नई दिशा देने में योग सहायक है। योग को अपने जीवन में शामिल करके मैंने ऐसा पाया। इसके लिए मैं स्वामी शिवानंद, स्वामी सत्यानंद और स्वामी निरंजनानंद को आभार देता हूं।

स्वामी नागा सिंघा, ईराक

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योग हमें केन्द्रित होने की कला सिखाता है। इसी योग ने हमें अपने जीवन में सफल बनाया। इसके लिए शिवानंद योग मिशन के प्रवाहक आदरणीय हैं।

अर्जुन अटवाल, गोल्फ स्टार

प्रवासी भारतीय अमेरिकी

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1971 में स्वामी सत्यानंद सरस्वती कोलंबिया गए थे। तब मैंने पहली बार जाना कि योग विज्ञान जीवन में परम आनंद प्राप्ति का मार्ग है। स्वामी जी के सानिध्य में अपने आप में परम आनंद की प्राप्ति कर रहा हूं।

स्वामी अग्निदेवा, कोलंबिया

Source: http://www.jagran.com/bihar/munger-10815261.html

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