पोलो मैदान में सिमट गई पूरी दुनियां

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– योग की आंधी में गिर गई भाषा-विभेद की दीवार

– विश्व योग सम्मेलन में चरितार्थ हो रहा है वसुधैव कुटुंबकम

मुंगेर, निज संवाददाता : योग नगरी मुंगेर में योग की आंधी चल रही है- जिसमें एक साथ भाषा-विभेद की हर दीवार ढह गई। न भाषा का बंधन, न धर्म का। न ही अमीरी का भाव है और न ही गरीबी की हीनता। हर तरफ बस योग के झंडा को और उंचा करने की तमन्ना। जी हां, पोलो मैदान में आयोजित विश्व योग सम्मेलन में सही मायने में वसुधैव कुटुंबकम की भावना चरितार्थ हो रही है। ऐसा लग रहा है कि पूरी दुनियां ही पोलो मैदान में सिमट आई हो। एक ओर जहां दुनियां के अलग-अलग देश और भारत के 23 राज्यों के प्रतिनिधि सम्मेलन में शिरकत कर रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर मुंगेर के सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के ग्रामीण भी। फर्राटेदार अंग्रेजी बोल रहे विदेशी प्रतिनिधि, तो बमुश्किल से टूटी-फूटी हिंदी बोल पाने वाले ग्रामीण भी। लेकिन, दोनों के बीच एक अद्भूत समानता है। हरि ऊं और योगा। क्रोएशिया से आए स्वामी ज्ञान रत्ना ने क्रोएशिया भाषा में जब अपनी बात कहना प्रारंभ किया, तो नौवागढ़ी सुनीता देवी की समझ में कुछ नहीं आ रहा था। लेकिन, ज्ञान रत्ना के हरि ऊं कहते ही सुनीता ताली बजाने लगती है। बाद में जब ज्ञान रत्ना की बातों को हिंदी में अनुवाद करते हुए कहा कि मैं फाइटर पाइलट था। मुझे सिखाया गया था- कैसे किसी को मारे। लेकिन, गुरु जी ने हमें सिखाया – कैसे किसी को प्यार करें। क्रोएशिया में योग का पौध तुलसी जैसा पवित्र है। यह सुनते ही पंडाल तालियों से गूंज उठा। वहीं, कोलंबिया से आए स्वामी अग्निदेवा, फ्रांस से आए स्वामी योग शक्ति भी क्रमश : कोलंबियन और फ्रेंच में उदगार व्यक्त कर रहे थे। लेकिन, योग और गुरु के प्रति उनके समर्पण मुंगेर के लोगों को भा रहा था। प्रसिद्ध गोल्फ खिलाड़ी अर्जुन अठवाल ने भी अंग्रेजी में अपने विचार व्यक्त किए। लेकिन, पंडाल में उपस्थित लोग के लिए भाषा कोई बड़ी बाधा नहीं बन रही थी। वहीं, खालिस हिंदी में दिए प्रवचन और कीर्तन पर झूमते विदेशी मेहमानों की टोली भी बता रही थी कि योग की आंधी में भाषा-विभेद की दीवार गिर गई है। पोलो मैदान में विभिन्न देशों की संस्कृति एकाकार हो कर योग संस्कृति में परिणत हो रही है।

Source: http://www.jagran.com/bihar/munger-10815619.html

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