सिर्फ बाह्य सुंदरता से नहीं बनेगा सुंदर समाज

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विश्व योग सम्मेलन के पहले दिन बुधवार की संध्या दूसरे सत्र में ‘चेतना के विकास में योग की भूमिका’ पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ। जगन्नाथपुरी से आए जगन्नाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष गजपति महराज दिव्य सिंह देव ने कहा कि सिर्फ बाह्य सुंदरता से सुंदर समाज का निर्माण नहीं हो सकता। आंतरिक सुंदरता के लिए प्रयास करना होगा। यह अलग बात है कि सरकारें और आम लोग भी इस बात को नहीं समझ पा रहे हैं। सिर्फ सुंदर सड़कें और उद्योग स्थापित करना ही विकास नहीं है। जैसे रावण ने स्वर्ण लंका बनाई। लेकिन, सत्य व धर्म की स्थापना नहीं की। परिणाम क्या हुआ, सोने की लंका जल गई। सुंदर समाज के निर्माण के लिए प्रत्येक मानव का विकास करना होगा। आइंस्टीन ने कहा था-वी मस्ट ब्रीफ हिम सेल्फ (हमें खुद को सुंदर बनाना होगा)। गजपति महराज ने कहा कि सबसे पहले हमारी शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाना होगा। शिक्षा से आध्यात्मिक विज्ञान को जोड़ना होगा। अध्यात्म मनुष्य को संस्कारित बनाता है। सही मायने में अध्यात्म युक्त शिक्षा देने से ही बदलाव आएगा। नहीं, तो एक दिन सभी मानव जानवर हो जाएंगे, उस दिन पृथ्वी पर जीवन ही संकट में पड़ जाएगा। वहीं, अलवर राजस्थान से आए स्वामी मुक्तानंद जी महाराज ने कहा कि चित्त एक नदी की तरह है। संसार में तीन प्रकार के प्राणी होते हैं। एक जिनका चित्त स्थिर होता है। दूसरा जिनका चित्त विषयों की तरफ अधिक आकर्षित होता है। अधिकांश लोग इसी श्रेणी में आते हैं। गुरु और शास्त्र के जरिये चित्त के सांसारिक प्रवाह को लोक कल्याण की ओर मोड़ा जा सकता है। निरंतर अभ्यास के जरिये जीवन का विकास हो सकता है। वहीं, चेतना के विकास बाद लोक कल्याण का मार्ग स्वत: खुलने लगता है। स्वामी मुक्तानंद जी ने कहा कि ईमानदारी से कमाया हुआ धन भी आवश्यकता से अधिक नहीं रखना ही अपरिग्रह है। इसके लिए चेतना का विकास आवश्यक है। महर्षि पतंजलि ने योग में इसके लिए उपाय सुझाए हैं। गुरु के प्रति संपूर्ण समर्पण से परमात्मा से मिलन संभव है। गुरु के प्रति संपूर्ण श्रद्धा की अवस्था होती है। श्रद्धा योगी की रक्षा मां की तरह करती है। लेकिन, तीन चीजों में आदमी को कभी संतुष्ट नहीं होना चाहिए। ये हैं अध्ययन, आध्यात्म और दान। इन तीनों में संतुष्ट होना अपने व्यक्तित्व को खुद नुकसान पहुंचाने के समान है। सत्र की अध्यक्षता स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने की और मंच संचालन शिवधारा ने किया।

इधर, स्वामी निरंजनानंद ने बताया कि गुरुवार को सम्मेलन में शामिल होंगे छत्तीसगढ़ के राज्यपाल। मौके पर कई साधु संत मौजूद थे।

Source:http://www.jagran.com/bihar/munger-10815320.html

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