राजनीति से प्रेरित है योग का विरोध : संजीव चतुव्रेदी

10404086_1162323910460416_5814142307195473483_n

प्राचीन मनीषियों की सोच आज नियंतण्र विचारधारा बन गई है। सन् 2014 में संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा ने सर्वसम्मति से 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव पारित किया। जब दिन-रात पूरी तरह असंतुलित होते हैं, ऐसे समय समत्व योग उच्यते की प्रासंगिकता स्पष्ट प्रतीत होती है। योग की ताकत और महत्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बिहार योग विद्यालय, मुंगेर के प्रेरक एवं संस्थापक स्वामी सत्यानंद सरस्वती ने 1963 में स्पष्ट घोषणा की थी, ‘योग परम शक्तिशाली विश्व संस्कृति के रूप में प्रकट होगा और विश्व की घटनाओं को निर्देश देगा।’ योग क्या है, इसे भारतीय संस्कृति का अंग माना जाता है, योग हमारे देश की जीवन शैली है, अनुशासन का बीज केंद्र है, वगैरह-वगैरह जैसे तमाम आयाम पर प्रस्तुत हैं बैंकाक में कार्यरत ‘डिवाइन योग’ के संस्थापक एवं निदेशक संजीव चतुव्रेदी से राजीव मंडल की बातचीत के चुनिंदा अंश:

. योग क्या है? विस्तार से बताएं। – योग एक प्राचीन भारतीय जीवन पद्धति है। योग अनुशासन है। योग के अनुशासन को अपना कर हम अपने जीवन के विभिन्न उद्देश्यों को प्राप्त कर सकते हैं। योग के विभिन्न आसनों की मदद से हम शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त कर सकते हैं, जो सफल, स्वस्थ और खुशहाल व्यक्तित्व के लिए आवश्यक है। महर्षि पतंजलि ने योग के आठ अंग बताए हैं। इनमें यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धरना, ध्यान और समाधि हैं। लेकिन दूसरे माध्यम भी हैं जैसे भक्ति योग, कर्म योग, ज्ञान योग, स्वर योग, हठ योग आदि। योग शरीर, व्ययहार, मन और भावनाओं को नियंत्रित करने वाली एक जीवन शैली है। यह दिल, दिमाग और हाथों के संबंधों या विशेषताओं को बढ़ाने वाली जीवन शैली है।

. योग को ख्याति मिलने में इतना वक्त क्यों लगा? – पहले योग की शिक्षा गुरु-शिष्य परंपरा के तहत दी जाती थी। योग संबंधी साहित्य का अभाव था। इसलिए इसे ख्याति मिलने में वक्त लगा। धीरे-धीरे अच्छा साहित्य आने लगा तो आमजन में इसकी स्वीकार्यता बढ़ने लगी। खासकर बिहार योग विद्यालय, मुंगेर के प्रेरक एवं संस्थापक स्वामी सत्यानंद सरस्वती के प्रयास से योग आमजन तक पहुंचने लगा। उन्होंने योग के अभ्यासों की सरल भाषा में व्याख्या की। पहले योग को साधु-संन्यासियों की चीज समझा जाता था, लोगों को ज्यादा पता नहीं था। फिर 90 के दशक के बाद मीडिया का उभार हुआ तब योग घर-घर पहचाना जाने लगा। एक कारण यह था कि जो भी लोग योग गुरु थे जैसे स्वामी शिवानंद, स्वामी सत्यानंद, स्वामी निरंजन, बीकेएस अयंगर, उन लोगों ने व्यवसाय की तरह योग की तिजारत नहीं की। उनका उद्देश्य पैसा कमाना नहीं था।

. क्या योग को जब वैज्ञानिक स्वीकृति मिली तभी इसे लोगों ने स्वीकारा? योग के पॉपुलर होने का कारण विज्ञान भी है। सर्वविदित है कि जितना विज्ञान विकास करेगा उतना योग भी विकास करेगा। विज्ञान के दम पर हम योग के फायदे दिखा सकते हैं। बहुत सारे शोध में योग के प्रभाव को दिखाया और समझाया गया है। मैंने खुद कई सारे शोध कार्य किए हैं। जैसे विभिन्न रोगों पर योग का क्या प्रभाव होता है। लोग जानकर आश्र्चयचकित रह जाते हैं कि मधुमेह, अस्थमा, रक्तचाप, माइग्रेन, पाचन की समस्या, गला/पीठ के जानलेवा दर्द आदि रोगियों को योग से रोग मुक्त किया जा सकता है। मेरा मानना है कि विज्ञान और योग मिलकर अनेक बीमारियों का खत्मा कर सकते हैं। हां, मीडिया के आने के बाद लोगों को योग से होने वाले फायदे को समझने में आसानी हुई और लोग इसे अपनाने लगे। योग अब काफी ग्लैमराइज हो गया है।

क्या इसका फायदा इसे मिला या इसने इस प्राचीन पद्धति का नुकसान किया? ग्लैमरराइज होने का फायदा है , तो नुकसान भी। इतने दिनों में मैंने काफी करीब से महसूस किया है कि पैसा और प्रसिद्धि तो योग के चलते आई है, लेकिन इस क्षेत्र में गुणी शिक्षक नहीं आ रहे। अच्छी शिक्षण संस्थाओं का घोर अभाव है। सरकार का भी इस पर कोई नियंतण्रनहीं है। योग के नाम पर कोई कुछ भी सीखा रहा है। हालांकि कुछ गुणवान और जानकार शिक्षक हैं, लेकिन गिनती के। एक और समस्या जो मैंने महसूस की है, यह है कि विदेशी संस्थाएं और योग स्कूल भी अब काफी संख्या में खुल गए हैं, जो एक तरह से लोगों को उल्टा-सीधा पढ़ाकर और मोटी रकम वसूल कर योग शिक्षक बना रहे रहे हैं। लेकिन ऐसे लोग योग न सीखकर सिर्फ शारीरिक अभ्यास ज्यादा सीखते हैं, जिम्नास्टिक की तरह। हालांकि कुछ अच्छे विदेशी शिक्षक भी हैं, लेकिन ज्यादातर जिम्नास्ट ही हैं। इसकी वजह से भारतीय शिक्षक पीछे होते जा रहे हैं। इसलिए मेरी सरकार से गुजारिश है कि शिक्षकों की गुणवत्ता पर गंभीरतापूवर्क ध्यान दे। मेरे विचार से सरकार को ‘बिहार स्कूल ऑफयोग’ (मुंगेर) को भी अपने योग के उद्देश्यों को बढ़ाने में शामिल करना चाहिए। योग के कई आसन ऐसे हैं जिन्हें बिना समुचित जानकारी के नहीं करना चाहिए।

क्या कहेंगे? काफी अच्छा सवाल किया आपने। योग है तो बहुत फायदेमंद लेकिन अगर आप इसे बिना सोचे-समझे करेंगे तो नुकसान भी पहुंचा सकता है। उदहारण के लिए आप कपालभाति को ही लीजिए। टेलीविजन पर देखकर आज सैकड़ों की तादाद में लोग कपालभाति कर रहे हैं, जो बिल्कुल गलत है। दरअसल, कपालभाति हठयोग की शुद्धि क्रिया है लेकिन स्वामी सत्यानन्द ने इसको पण्रायाम में शामिल किया और विस्तारित किया कि इसे (आसन या क्रिया जो कहना चाहें) किसे करना है, और किसे नहीं। टेलीविजन पर बताया जाता है कि यह अभ्यास दिल के लिए बेहद कारगर है, और यह जानकर इसे वो लोग करने लगे जिन्हें हृदय रोग की समस्या या ब्लड प्रेशर है। जबकि कपालभाति हृदयरोग और उच्च रक्तचाप वालों के लिए काफी खतरनाक है। इससे ब्रेन डैमेज, पैरालिसिस भी हो सकती है। इसलिए योग का अभ्यास टीवी देखकर नहीं बल्कि किसी योग्य शिक्षक की मौजूदगी या सानिध्य में ही करना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित करने का कितना फायदा योग और भारत को मिला है? जी हां, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बहुत बड़ा काम एक ही झटके में कर दिया। बिना शक-सुबहा किए यह तो निस्संकोच कहा जा सकता है कि इस पहल से न सिर्फ योग को फायदा मिलेगा बल्कि जनता को भी काफी लाभ होगा। क्योंकि इतने सालों में अब जाकर विश्व के कई देशों और उनकी सरकारों ने योग पर नजरेइनायत की है, लेकिन में आशा करता हूं किंिहंदुस्तान में भी सरकार योग शिक्षण की गुणवत्ता पर ध्यान देगी।

. भारत की जनता से कितनी अलग दिखती है विदेश की जनता? विदेश में जनता अपने स्वास्थ्य के प्रति ज्यादा सजग है, लेकिन भारत में जब लोगों को कोई दिक्कत होती है तभी वो योग की बात करते हैं, या योग के फायदे पर चिंतन करते हैं। विशेषकर विदेशी महिलाएं योग के प्रति काफी जागरूक रहती हैं। उदाहरण के लिए अगर किसी क्लास में सौ के करीब लोग हैं, तो उनमें 95 महिलाएं होती हैं। हालांकि विदश में शारीरिक योग ज्यादा प्रचलित है लेकिन अब धीरे-धीरे योग के अन्य आयामों के प्रति भी लोग आकर्षित हो रहे हैं। मेरा मानना है कि समाज जितना ज्यादा विकसित होगा, योग की जरूरत लोगों को उतनी शिद्दत से महसूस होगी। चूंकि विकसित देशों में लोग शारीरिक श्रम कम करते हैं, इसलिए स्वस्थ और फिट रहने के वास्ते उनके लिए योग का कोई विकल्प नहीं है।

. योग के नाम पर भारत में हो रही राजनीति के बारे में क्या कहना चाहेंगे? योग को लेकर विवाद अनावश्यक है। यह राजनीति से ज्यादा प्रेरित लगता है। मैं पिछले आठ सालों से विदेश में योग की शिक्षा दे रहा हूं और मेरी क्लास में पाकिस्तान, बांग्लादेश, दुबई, तुर्की, ईरान, इंडोनेशिया आदि मुस्लिम बहुल देशों के लोग बिना किसी राग-द्वेष और संदेह के योग करते हैं। मंत्र का जाप भी करते हैं।

11202096_1162386843787456_6822791630816871640_n

Source: http://rashtriyasahara.com/epapermain.aspx?queryed=17

 

Filed in: In The News, Yoga & Meditation Tags: 

You might like:

India delighted to host World Environment Day: PM Modi India delighted to host World Environment Day: PM Modi
PM Narendra Modi inaugurates Delhi-Meerut Expressway PM Narendra Modi inaugurates Delhi-Meerut Expressway
Plastic pollution adversely impacts nature, wildlife and our health: PM Modi during Mann Ki Baat Plastic pollution adversely impacts nature, wildlife and our health: PM Modi during Mann Ki Baat
Prime Minister to inaugurate Eastern Peripheral Expressway and Phase -I of Delhi-Meerut Expressway Prime Minister to inaugurate Eastern Peripheral Expressway and Phase -I of Delhi-Meerut Expressway

Leave a Reply

Submit Comment
*

© 2018 . All rights reserved. XHTML / CSS Valid.
Proudly designed by MBR.